गन्ना बीज बदलाव कार्यक्रम: वैज्ञानिकों ने दिए उन्नत खेती और संतुलित खाद प्रयोग के टिप्स

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रुद्रपुर | संवाददाता
गन्ना विकास विभाग द्वारा चलाए जा रहे ‘गन्ना बीज बदलाव कार्यक्रम’ के तहत गुरुवार को सहायक गन्ना आयुक्त कार्यालय, रुद्रपुर के प्रांगण में एक दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जिले भर से आए सैकड़ों किसानों को गन्ने की खेती को घाटे से उबारकर मुनाफे की ओर ले जाने के आधुनिक तरीके सिखाए गए।
​संतुलित खाद और कीटनाशकों पर विशेष जोर
गन्ना अनुसंधान केंद्र, काशीपुर से पधारे प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. संजय कुमार एवं श्री प्रमोद सिंह ने मुख्य प्रशिक्षक के रूप में तकनीकी सत्र का संचालन किया। डॉ. संजय ने कहा कि “वर्तमान समय में मृदा स्वास्थ्य को बचाना सबसे बड़ी चुनौती है। किसान भाई खेती में कीटनाशकों और उर्वरकों का प्रयोग करते समय ‘अनुपात’ का विशेष ध्यान रखें।” उन्होंने संतुलित खाद के प्रयोग पर जोर देते हुए बताया कि अत्यधिक रसायनों के उपयोग से न केवल लागत बढ़ती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी क्षीण होती है।
​क्षेत्रवार किस्मों का चयन और बुवाई तकनीक
प्रशिक्षण के दौरान श्री प्रमोद सिंह ने ऊधमसिंह नगर क्षेत्र की जलवायु के अनुकूल संस्तुत गन्ना प्रजातियों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने ट्रेंच विधि से बुवाई, रिंग पिट विधि और अंतर-फसल खेती के लाभ गिनाए। उन्होंने कहा कि समय पर बीज बदलाव करने से फसल में लगने वाले रोगों, विशेषकर ‘लाल सड़न रोग’ (Red Rot) से बचा जा सकता है।
​विभागीय योजनाओं की दी गई जानकारी
सहायक गन्ना आयुक्त श्री शैलेन्द्र सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि विभाग का लक्ष्य गन्ने के क्षेत्रफल को बढ़ाने के साथ-साथ प्रति एकड़ उत्पादन में वृद्धि करना है। उन्होंने सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी, कृषि यंत्रों पर छूट और बीज बदलाव हेतु मिलने वाले अनुदान की विस्तृत जानकारी दी।
​इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्य रूप से ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक श्री ऊदल सिंह, श्री गौतम नेगी, श्री बी.के. चौधरी, श्री नवनीत सिंह एवं श्री महेश प्रसाद सहित विभाग के अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में एक प्रश्नोत्तरी सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें वैज्ञानिकों ने किसानों द्वारा पूछे गए जटिल सवालों के मौके पर ही समाधान बताए। भारी संख्या में उपस्थित कृषकों ने इस सत्र को खेती के लिए अत्यंत लाभकारी बताया।
​मुख्य आकर्षण:
​बीज बदलाव: पुरानी प्रजातियों को छोड़ नई उन्नत किस्मों को अपनाने पर चर्चा।
​लागत में कमी: कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग पर लगाम लगाने की सलाह।
​सीधा संवाद: वैज्ञानिकों और किसानों के बीच तकनीकी विषयों पर गहन विमर्श।

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