किच्छा:पूर्व दर्जा राज्यमंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस महामंत्री डॉ गणेश उपाध्याय ने प्रेस को जारी एक विज्ञप्ति में कहा है कि भाजपा सरकार की प्रशासनिक कार्रवाई के कारण ऐसी कानूनी स्थिति बनी जिसमें पहले से घोषित चुनाव की मतगणना माननीय उच्च न्यायालय द्वारा रोकनी पड़ी, इसका सीधा अर्थ है कि सरकार ने चुनाव प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से जटिल बनाया।
जब अदालत में मामला लंबित था तो अधिसूचनाएँ जारी करने में जल्दबाजी क्यों की गयी।
सिरौलीकलां के क्षेत्रीय गठन/अलग किए जाने को लेकर पहले से विवाद चल रहा था। इसके बावजूद बाद में चुनाव संबंधी अधिसूचना जारी हुई।
सरकार को जब पहले से पता था कि संबंधित अधिसूचना न्यायालय में चुनौती के अधीन थी और बाद में उस अधिसूचना को वापस लेने की कार्रवाई भी हुई। ऐसे घटनाक्रम पर भाजपा सरकार की स्थानीय निकाय चुनाव में होती हार पर घबराहट और बेचैनी से इनकी मंशा पर सवाल उठाया है। उन्होने कहा कि उत्तराखंड भाजपा सरकार व राज्य निर्वाचन आयोग ने न्यायालय में लंबित मामले को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त सावधानी नहीं बरती।
मतदाताओं के अधिकार और चुनाव परिणाम घोषित करने में देरी ठीक नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 243ZA के अनुसार नगरपालिकाओं के चुनावों के संचालन का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण राज्य निर्वाचन आयोग में निहित है। इसलिए सरकार की किसी ऐसी कार्रवाई पर सवाल उठाया जा सकता है जो आयोग की स्वतंत्र चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करती दिखाई दे रही है।

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