किच्छा (उत्तराखंड):उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले की किच्छा तहसील इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सुर्खियों में है। तहसील क्षेत्र में दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के कार्यों में भारी सुस्ती, लेटलतीफी और लापरवाही देखने को मिल रही है। आम जनता अपनी जमीनों के दाखिल-खारिज और अन्य जरूरी कार्यों के लिए तहसील के चक्कर काटने को मजबूर है, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी उनकी फाइलें संबंधित पटल पर धूल फांक रही हैं। हैरानी की बात यह है कि जनता की इस गंभीर समस्या पर तहसील प्रशासन पूरी तरह से मौन साधे बैठा है, जिससे स्थानीय नागरिकों और किसानों में भारी रोष व्याप्त है।
महीनों से लंबित हैं फाइलें, तय समय सीमा का हो रहा उल्लंघन
प्राप्त जानकारी के अनुसार, किच्छा तहसील में दाखिल-खारिज के लिए आवेदन करने वाले किसानों और आम नागरिकों को अपने कामों के लिए महीनों इंतजार करना पड़ रहा है। ऑनलाइन आवेदन करने के बावजूद तय समय सीमा के भीतर मामलों का निस्तारण नहीं किया जा रहा है। तहसील परिसर के चक्कर काटकर थक चुके लोगों का आरोप है कि रजिस्टर्ड कानूनगो स्तर पर फाइलों को बिना किसी ठोस और न्यायसंगत कारण के लटकाया जा रहा है, जिससे आम आदमी का मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न हो रहा है।
पीड़ितों का दर्द: एक साल से चक्कर काट रहे मोहन पांडे
तहसील की इस लचर व्यवस्था का शिकार हुए जवाहर नगर निवासी मोहन पांडे ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पिछले एक साल से उनकी दाखिल-खारिज की फाइल लंबित पड़ी है, लेकिन तहसील स्तर पर सिर्फ कोरे आश्वासन ही मिल रहे हैं,समाधान नहीं ?जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठ रहे बड़े सवाल
क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं और पीड़ित नागरिकों ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाकर सभी लंबित मामलों का त्वरित निस्तारण नहीं किया गया, तो जनता बड़ा आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।
वहीं, इस पूरे संवेदनशील मामले पर जब स्थानीय जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उनकी ओर से कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला, जिससे प्रशासन की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर बड़े और गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

एडिटर / संपादक: स्पीड न्यूज़ उत्तराखंड
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