उधम सिंह नगर: फर्जी प्रमाण पत्रों के खुलासे के बाद राजस्व उप निरीक्षक कार्य बहिष्कार पर, प्रमाण पत्र प्रक्रिया में भारी देरी।
उधम सिंह नगर जिले में राजस्व उप निरीक्षकों द्वारा आय, जाति और मूल निवास प्रमाण पत्रों के कार्य के बहिष्कार से आम जनजीवन प्रभावित होने लगा है। यह विरोध प्रशासन द्वारा जाली दस्तावेजों के मामलों के सामने आने के बाद उठाए गए सख्त कदमों के जवाब में शुरू हुआ है।
बाजपुर और गदरपुर में राजस्व उप निरीक्षक के निलंबन के विरोध में राजस्व उप निरीक्षकों ने कार्य का बहिष्कार कर दिया है। इससे प्रमाण पत्रों के सत्यापन में देरी हो रही है, जिससे आवेदकों, विशेषकर छात्रों और नौकरी चाहने वालों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में काम प्रभावित है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन और राजस्व उप निरीक्षकों के बीच बातचीत के जरिए इस गतिरोध का जल्द समाधान निकाला जाना चाहिए ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
प्रमुख बिंदु:
- प्रमाण पत्र प्रक्रिया पूरी तरह ठप: किच्छा तहसील सहित पूरे जिले में आय, जाति और स्थाई निवास प्रमाण-पत्रों के सत्यापन का कार्य पूरी तरह रुक गया है।
- छात्रों का भविष्य दांव पर: शिक्षण संस्थानों में प्रवेश (एडमिशन) और छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) के आवेदन अटकने से विद्यार्थियों की चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं।
- दर-दर भटकने को मजबूर आम जनता: दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले बुजुर्गों, महिलाओं और नागरिकों को बिना काम कराए रोजाना दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
- अड़ियल रुख और गतिरोध: प्रशासन के सख्त नियमों और राजस्व उप निरीक्षकों (लेखपाल/पटवारी) की हड़ताल के बीच अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
प्रशासनिक सख्ती और पटवारियों का विरोध
जिले में फर्जी प्रमाण पत्रों के मामलों के खुलासे के बाद प्रशासन ने आय, जाति और मूल निवास प्रमाण पत्र जारी करने से पहले स्थल की भौतिक जांच और फोटोग्राफी को अनिवार्य कर दिया था। इसके साथ ही एक राजस्व उप निरीक्षक के निलंबन का मामला भी तूल पकड़ गया है।
उत्तराखंड लोकपाल संघ के जिला अध्यक्ष पिंटू गौतम ने इस संबंध में स्पष्ट कहा है कि “जब तक निलंबित राजस्व उप निरीक्षक को बहाल नहीं किया जाएगा, तब तक पटवारी/लेखपाल संघ कार्य बहिष्कार पर डटा रहेगा।”
छात्रों और आम नागरिकों की बढ़ी मुश्किलें
इन दिनों स्कूल-कॉलेजों में प्रवेश और छात्रवृत्ति के आवेदन के लिए प्रमाण पत्रों की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है। स्थानीय छात्रों का कहना है कि यदि यह गतिरोध जल्द समाप्त नहीं हुआ, तो कई महत्वपूर्ण फॉर्म भरने और दाखिले की अंतिम तिथियां निकल जाएंगी, जिससे उनका पूरा शैक्षणिक वर्ष खतरे में पड़ सकता है।
वहीं, दूर-दराज के गांवों से तहसील पहुंच रहे आम लोगों को निराशा हाथ लग रही है, जिससे शासन-प्रशासन के खिलाफ जनता में रोष लगातार बढ़ रहा है।
जनता की पुकार
किच्छा क्षेत्र की आम जनता और छात्र-छात्राओं ने जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि इस गंभीर समस्या का तत्काल संज्ञान लिया जाए। प्रशासन और पटवारी संघ के बीच जल्द से जल्द वार्ता कर कोई बीच का रास्ता निकाला जाए, ताकि हड़ताल समाप्त हो सके और जनता व छात्रों को इस भारी असुविधा से त्वरित राहत मिल सके।

एडिटर / संपादक: स्पीड न्यूज़ उत्तराखंड
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