उत्तराखंड में गन्ने का पिराई सत्र समाप्त हुए लगभग दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन प्रदेश के गन्ना किसानों को अभी तक अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई का इंतजार है। बाजपुर, नादेही, किच्छा और डोईवाला चीनी मिलों द्वारा किसानों का करोड़ों रुपये का भुगतान न किए जाने से किसानों के सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए इसे ‘कुंभकरणीय नींद’ में सोई सरकार की संवेदनहीनता करार दिया है।
चार प्रमुख मिलों पर करोड़ों का बकाया: एक नजर में
प्रदेश की चार बड़ी चीनी मिलों पर किसानों का कुल मिलाकर लगभग 81 करोड़ 47 लाख रुपये का भुगतान बकाया है।
क्या सरकार बकाये पर देगी ब्याज? — कांग्रेस
उत्तराखंड कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ. गणेश उपाध्याय ने सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा, “यह सरकार की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है कि वह किसानों का समय पर भुगतान सुनिश्चित करे। जब एक गरीब किसान बैंक से कर्ज लेता है, तो उसी दिन से उस पर ब्याज लगना शुरू हो जाता है। ऐसे में सरकार को जवाब देना चाहिए कि क्या वह किसानों के इस कड़कड़ाते बकाये का भुगतान ब्याज सहित करेगी?”
2027 विधानसभा चुनाव में भुगतना होगा खामियाजा
कांग्रेस प्रवक्ता ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने जल्द ही किसानों के संपूर्ण बकाये का भुगतान नहीं किया, तो इसका खामियाजा सत्ताधारी दल को आने वाले 2027 के विधानसभा चुनावों में भुगतना पड़ेगा। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि अब समय आ गया है जब किसानों को अपने हक और हितों की रक्षा के लिए एकजुट होना होगा। सरकार पूरी तरह से कुंभकरणीय नींद में सोई हुई है और उसे जगाने के लिए सामूहिक आवाज बुलंद करनी होगी।
किसानों में बढ़ता आक्रोश
पिराई सत्र खत्म होने के दो महीने बाद भी जेब खाली होने से किसानों में भारी आक्रोश है। अगली फसल की बुवाई, खाद-बीज के खर्च और घरेलू जरूरतों के लिए किसान दाने-दाने को मोहताज हो रहे हैं। किसान संगठनों का कहना है कि यदि जल्द ही भुगतान की तारीखों का ऐलान नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

एडिटर / संपादक: स्पीड न्यूज़ उत्तराखंड
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