किच्छा (शांतिपुरी)। अक्सर लोग सेवानिवृत्ति (Retirement) के बाद आराम का जीवन चुनते हैं, लेकिन ग्राम शांतिपुरी नंबर-2 भरतपुर निवासी श्री भुवन चंद्र बुघानी ने इस धारणा को बदल दिया है। जिला ग्रामोद्योग अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद, उन्होंने अपने शौक को एक सफल व्यवसाय में बदलकर क्षेत्र के युवाओं और किसानों के लिए प्रेरणा पेश की है। आज उनके द्वारा उत्पादित शहद की गूंज राज्य स्तर तक है।
नौकरी के साथ भी जारी रहा प्रकृति से जुड़ाव
श्री बुघानी की रुचि बचपन से ही प्रकृति और मधुमक्खी पालन में थी। वर्ष 1983 में उन्होंने पुणे के ‘सेंट्रल बी रिसर्च इंस्टिट्यूट’ से प्रशिक्षण लिया था। नौकरी की व्यस्तता के बावजूद उनका यह लगाव कम नहीं हुआ और वे छोटे-छोटे प्रयोग करते रहे। वर्ष 2020 में रिटायर होने के बाद, उन्होंने इसे बड़े स्तर पर करने का संकल्प लिया।
सरकारी योजनाओं ने दी पंख
वर्ष 2023 में उद्यान विभाग के सहयोग से उन्हें 80 प्रतिशत अनुदान पर बी-बॉक्स प्राप्त हुए। वहीं, 2025 में PMFME योजना के तहत उन्होंने अपनी स्वयं की ‘हनी प्रोसेसिंग यूनिट’ स्थापित की। इस आधुनिक तकनीक का लाभ यह हुआ कि जो कच्चा शहद पहले ₹250 प्रति किलो बिकता था, वह अब प्रोसेस्ड और बेहतर ब्रांडिंग के साथ बाजार में ₹350 से ₹500 प्रति किलो तक बिक रहा है।
राज्यपाल के हाथों दो बार हुए सम्मानित
शहद की शुद्धता और गुणवत्ता के कारण श्री बुघानी को वर्ष 2024 और 2025 में देहरादून में आयोजित ‘बसंतोत्सव’ के दौरान महामहिम राज्यपाल द्वारा सम्मानित किया गया। उनकी इस सफलता में उनकी पत्नी श्रीमती उषा बुघानी और पुत्र धीरज बुघानी का भी अहम योगदान है।
युवाओं को दे रहे हैं गुरुमंत्र
श्री बुघानी अब केवल एक मधुमक्खी पालक ही नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक भी हैं। वे कृषि विश्वविद्यालय में अतिथि प्रवक्ता के रूप में सेवा दे रहे हैं और क्षेत्र के स्कूली बच्चों व युवाओं को मधुमक्खी पालन के व्यावहारिक गुर सिखा रहे हैं। उनका मानना है कि यदि धैर्य और सरकारी योजनाओं का सही लाभ लिया जाए, तो खेती और स्वरोजगार से बेहतर कोई विकल्प नहीं है।

